18 साल की उम्र में विधवा हो गईं थी ललिता, जज्बे ने बनाया देश की पहली महिला इंजीनियर

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देश ENGINEER’S Day मना रहा है. हम अक्सर इंजीनियर्स की बात करते वक्त कई नाम गिना जाते हैं. आप ध्यान से सोचिए कि उनमें कितनी महिलाएं होती हैं. क्योंकि हमें शायद यही नहीं पता कि देश की पहली महिला इंजीनियर कौन थी. ए. ललिता थीं देश की पहली महिला इंजीनियर:

ललिता, सबसे दाएं (फोटो: The Hindu)

ए. ललिता भारत की पहली महिला इंजीनियर

वो दौर था साल 1937 का, देश अब भी गुलामी की जंजीरों से बाहर आने की सोच रहा था. ऐसे समय में ए. ललिता ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी. उस वक्त भारतीय महिलाओं और पुरुषों के बीच शिक्षा में काफी असामनता थी. ए. ललिला को देश की पहली महिला इंजीनियर होने का गौरव हासिल है.

15 की उम्र में शादी 18 में विधवा

ए.ललिता का जन्म साल 1919 में चेन्नई में हुआ था, उनके पिता सुब्बाराव इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर थे. महज 15 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई और किस्मत देखिए कि 18 साल में विधवा हो गईं. तब चार महीने की बच्ची उनके गोद में थी. लेकिन उन्होंने इन कठिन हालातों में भी अपने सपने को जिया. परिस्थितियों से लड़कर उसे बदलने की कोशिश की.

मेडिकल का कोर्स करना चाहती थी ललिता

उस समय तक कुछ महिलाओं ने डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर लिया था. ललिता को भी इससे प्रेरणा मिली थी वो डॉक्टर बनना चाहती थी. शादी के बाद 2 साल पढ़ाई जारी रखने के बाद उनकी पढ़ाई भी छूट गई थी.

ऐसे समय में उनके पिता ने उनकी मदद की और साल 1940 यानी 25 साल की उम्र में इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला दिलाया. साल 1943 में उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर ली थी.

एचिवमेंट्स और जॉब

ए. ल लिता ने अपने करियर की शुरुआत रेलवे में बतौर लोकोमोटिव वर्कशॉप एप्रेंटिस के तौर पर की, इसके बाद उन्हें सरकार के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में नौकरी मिल गई. कुछ ही सालों में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपने पिता के रिसर्च में हाथ बढ़ाया.

बाद में उन्होंनें एक ब्रिटिश फर्म एसोसिएटेड इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्रीज को ज्वाइन कर लिया. इस बीच उन्होंने लंदन के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट से डिग्री भी हासिल की.

रिटायरमेंट और देहांत

काफी लंबे समय तक इस कंपनी से जु़ड़े रहने के बाद यहीं से उन्होंने रिटायरमेंट हासिल की. बता दें कि ललिता देश की एकमात्र महिला इंजीनियर हैं जो International Conference of Women Engineers and Scientists में शामिल हुईं हैं. ये कॉन्फ्रेंस साल 1964 में हुआ था.
साल 1979 में ललिता का देहांत हो गया, लेकिन उनकी गौरवशाली कहानी हमेशा महिलाओं को प्रेरित करती रहेगी. ए. ललिता को Centre Women का सलाम.

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