मिसाल: पति की मौत के बाद दूसरों की हजामत बनाकर कमाती हैं देश की ‘पहली’ महिला नाई शांताबाई

Welldone, WomanHood

देश में महिलाओं की बात जब भी होती है उन्हें अबला दिखाकर सशक्तिकरण की तरह बहस खिंच जाती है. महिलाओं के सशक्तिकरण की बेशक जरूरत है, लेकिन जो महिलाएं खुद जज्बे और शक्ति की मिसाल बन चुकी हैं उनकी कहानियां भी सामने लाना होगा. ऐसी ही एक महिला हैं शांतिबाई, शांतिबाई का कोई ब्यूटी पार्लर तो नहीं लेकिन उन्हें देश की पहली महिला नाई कहा जा सकता है. सारी परंपराओं को धत्ता बताते हुए शांतिबाई ने अपने परिवार के लिए लिक से हटकर चलने का फैसला किया और बन गईं मिसाल. जानते हैं शांतिबाई के बारे में कुछ खास बातें:

(फोटो: दैनिक जागरण)

महाराष्ट्र के कोल्हापुर की रहने वाली हैं शांताबाई

शांताबाई कोल्हापुर की रहने वाली हैं, बेहद छोटी उम्र में उनकी शादी श्रीपति यादव से कर दी गई थी. शांति के पिता एक नाई थे, ऐसे में वो बचपन से पिता के काम को देखती आईं थी. शादी के बाद जब ससुराल आईं तो यहां आर्थिक हालात कुछ अच्छे नहीं थे. शांति के पति का सिर्फ खेती से गुजारा नहीं होता था, इसलिए उन्होंने गांव-गांव घूमकर हजामत यानी नाई का काम शुरू कर दिया.

पति के मौत के बाद अकेली पड़ी शांताबाई

लगातार काम के बावजूद शांति और उनके परिवार के हालात अच्छे नहीं थे, ऐसे में उन्हें पास के ही गांव के एक रसूखदार ने शांति के पूरे परिवार को दूसरे गांव(हसुरसासगिरी) में बुला लिया और इसके बाद थोड़ी बहुत अच्छी आमदनी होने लगी. लेकिन अचानक से श्रीपति की मौत हो जाने के बाद शांताबाई फिरे मुसीबतों से घिर गईं.

4 बेटियों की जिम्मेदारी थी शांता पर

ये दौर था साल 1984 का, शांता पर अब अपनी 4 बेटियों और खुद की जिम्मेदारी आ गई थी. मीडिया में छपे उनके इंटरव्यू बताते हैं कि बीच में उन्होंने मुफलिसी से आजिज आकर बेटियों समेत जिंदगी खत्म करने मन बना लिया था. फिर उनको किसी ने अपने पति का काम संभालने की सलाह दी. शांता ने भी सोच लिया कि जब ये समाज मेरे परिवार और मेरे लिए दो जून की रोटी नहीं दे सकता तो मैं क्यों करूं इस समाज की परवाह?

1984 में शुरू कर दिया नाई का काम

बेफिजूल की परंपरावादी सोच को धता बताते हुए शांता ने उस्तरा थाम लिया था. अब समाज है तो उनके ताने भी होंगे. शांताबाई का आसपास के लोग ही मजाक बनाने लगे लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. शुरुआत में वो बाल-दाढ़ी बनाने के एक रुपये लिया करते थे, इस बीच उन्होंने थोड़े ज्यादा पैसों के लिए मवेशियों के भी बाल काटे.

अब इज्जत है, बेटियों की शादी हो गई

शांताबाई ने इस काम के दम पर अपनी 4 बेटियों की शादी कर दी. गांववाले और आसपास के लोगों में उनके जज्बे के कारण ही इज्जत बढ़ने लगी. शांताबाई से वो सम्मानित ‘शांताताई’ हो गई. नाई समुदाय ने उन्हें सम्मानित भी कर चुका है. फिलहाल, वो 70 साल से ज्यादा की हो गई हैं लेकिन हजामत बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ती.

ये भी पढ़ें:क्या कभी नहीं सुधरेंगे ये नेता? बीजेपी सांसद ने बताया लड़कियों को टनाटन

Comments

comments

Leave a Reply