कादम्बिनी

देश की पहली महिला ग्रेजुएट और डॉक्टर कादम्बिनी गांगुली, जिन्होंने नजरिया ही बदल डाला

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देश में अब भी महिलाओं की साक्षरता दर पुरुषों से कम बनी हुई है. ये बात अलग है कि आज भी जब बोर्ड एग्जाम के रिजल्ट से लेकर यूपीएससी का रिजल्ट आता है तो लड़कियां ही बाजी मारती हैं. ऐसे में मिलते हैं आज एक ऐसी महिला से जिन्होंने गुलाम भारत की बंदिशों को तोड़ते हुए सिर्फ भारत में ही नहीं शिक्षा के जरिए दुनिया में नाम कमाया था. आइए जानते हैं देश की पहली महिला ग्रेजुएट कादम्बिनी गांगुली के बारे में खास बातें

कादम्बिनी
(फोटो: YouTube)

दक्षिण एशिया की पहली महिला डॉक्टर कादम्बिनी

18 जुलाई 1861 को बिहार के भागलपुर में कादम्बिनी का जन्म हुआ था. वो भारत की पहली ग्रेजुएट हैं साथ ही साथ पहली महिला फिजीशियन भी है. इतना ही नहीं कादम्बिनी गांगुली पूरे दक्षिण एशिया की पहली महिला हैं जिन्होंने यूरोपियन मेडिसिन में डिग्री और ट्रेनिंग हासिल की थी. बता दें कि 1886 में वो डॉक्टर बनीं थीं. हालांकि, इसी साल महाराष्ट्र की आनंदी बाई भी महिला डॉक्टर बनने में कामयाब हुई थीं. कादम्बिनी के बारे में आज भी जब बात होता है तो देश को गर्व महसूस होता है.

कादम्बिनी के पिता हेडमास्टर थे

कादम्बिनी का पूरा परिवार मूलरूप से बांग्लादेश के चांदसी से था. हेडमास्टर बृजकिशोर की बिटिया कादम्बनी बचपन से पढ़ाई में तेज थी. बृजकिशोर ब्रह्म समाज से जुड़े हुए थे और महिलाओं की प्रगति के लिए काम करते थे. ऐसे में शुरुआत घर से ही हुई. कादम्बिनी पहली ऐसी लड़की थी जिन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा पास की थी.

इनकी योग्यता को देखते हुए ही बेथून कॉलेज में फर्स्ट आर्ट्स नाम का एक कोर्स शुरू किया गया था. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा, उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटिश भारत के दौरान ही यूरो गईं. कई डिग्रियां लेकर वापस लौंटी थी. इसके बाद उन्होंने लेडी डफरन अस्पताल में कुछ दिनों काम किया.

21 की उम्र में विधुर से शादी

महज 21 साल की उम्र में कादम्बिनी की शादी एक ब्रह्म समाज सुधारक और 39 साल के विधुर द्वारकानाथ गांगुली से हो गई. उनके पहले से ही 5 बच्चे थे, बाद में कादम्बिनी से 3 बच्चे हुए. ऐसे में इतने बड़े परिवार का बोझ साथ ही बतौर डॉक्टर उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाईं.

महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए किया खास काम

द्वारकनाथ के साथ मिलकर कादम्बिनी ने समाज सुधार और महिलाओं के लिए काम करना शुरू कर दिया. इन दोनों ने मिलकर कई सामाजिक कार्य किए जिसमें कोयले की खानों में काम करने वाली महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए काम करना अहम था. कादम्बनी कांग्रेस की 6 महिला सदस्यों में से एक थीं. सिर्फ इतना ही नहीं कांग्रेस अधिवेशन में सबसे पहले भाषण देने वाली महिला का गौरव भी उन्हें प्राप्त है.

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