स्नेहलता

Teacher’s Day: पेंशन से स्कूल के बच्चों में ज्ञान बांट रही हैं 74 वर्षीय ‘गौरव मां’ स्नेहलता

Teacher's Day Special, Welldone

कुछ लोग नॉर्मल जिंदगी को थोड़ा अलग कर खास बना देते हैं और दूसरों के लिए मिसाल बन जाते हैं. ऐसी ही हैं स्नेहलता. दिल्ली के सरकारी स्कूल में टीचर रह चुकीं 74 वर्षीय स्नेहलता अब 200 से भी ज्यादा बच्चों के बीच ज्ञान की ज्योति जला रही हैं.

स्कूल से रिटायर होने के बाद उन्होंने गरीब बच्चों के लिए काम करना शुरू किया. स्नेहलता का दिल्ली से सटे गुड़गांव में ‘गौरव फाउंडेशन फॉर ह्यूमन ऐंड सोशल डेवलेपमेंट’ का एनजीओ भी है. उन्हें प्यार से लोग गौरव मां भी कहते हैं.

स्नेहलता
बच्चों के साथ स्नेहलता

स्नेहलता ने 2005 में की शुरूआत

साल 2005 में जब स्नेह लता ने झुग्गी-झोपड़ी में जाकर लोगों से बच्चों को काम करवाने के बजाए स्कूल भेजने की अपील की. उन्होंने गुड़गांव में ही एक स्कूल की शुरूआत की जहां शुरू में 20 बच्चे आया करते थे. ये बच्चे मजदूर और रिक्शा चलाने वाले लोगों के थे. आज इस स्कूल में करीब 200 बच्चे पढ़ते हैं.

पेंशन से चलता है स्नेहलता का स्कूल

रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन से ‘गौरव मां’ का स्कूल चलता है. काफी लोग यहां डोनेशन भी देते हैं. साथ ही कॉपी-किताबें भी यहां डोनेट की जाती हैं. पैसेकी कमी जरूर है लेकिन उनका हौंसला बुलंद है. उनके स्कूल में अंग्रेजी मीडियम में पढ़ाई होती है और बच्चों को यूनिफॉर्म भी दी गई है. स्नेहलता का मानना है किआगे बढ़ने के लिए अंग्रेजी आनी जरूरी है.

आप भी कर सकते हैं स्नेहलता की मदद

बहुत से स्कूल और कॉलेज के बच्चे इनके फाउंडेशन में खुद से आकर बच्चों को पढ़ाने में योगदान देते हैं. अगर आप चाहें तो आप भी इनकी मदद कर सकते हैं. 60साल की रिटायरमेंट के बाद हर व्यक्ति अपने लिए चैन और आराम की जिंदगी के बारे में सोचता है क्योंकि वो कहीं ना कहीं जिंदगी में नौकरी करते करते थकचुका होता है. लेकिन स्नेह लता से हम सबको प्रेरणा लेने की जरूरत है. जब तक ये जिंदगी है तब तक हमें और लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए.

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