महिला दिवस

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की कब हुई थी शुरुआत, क्या है इसके पीछे का राज? खास बातें जानिए

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दुनियाभर में 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाता है. एक ऐसा दिन, जिस दिन महिला सशक्तिकरण की बात होती है, महिलाओं के अधिकारों और उनके सपनों पर बहसें होती हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि पहले महिला दिवस न्यूयॉर्क में वहां की सोशलिस्ट पार्टी ने 28 फरवरी 1909 में मनाया था. आइए जानते हैं महिला दिवस से जुड़ी कुछ खास बातें.

महिला दिवस का सुझाव किसका था?

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव मार्क्सवादी थिंकर और एक्टिविस्ट क्लारा जेटकिन का था. जिन्होंने जिंदगीभर महिलाओं के अधिकारों और उनके खिलाफ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई. साल 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी महिलाओं की एक बैठक हुई जिसमें क्लारा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा.

1911 में मनाया गया महिला दिवस

इस बैठक में करीब 100 महिलाएं मौजूद रहीं, वो 17 अलग-अलग देशों से संबंध रखती थीं. साल 2011 में इन महिलाओं की मदद से स्विट्जरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी समेत कई देशों में महिला दिवस मनाया गया.

8 मार्च, महिला दिवस और रूस

अब 8 मार्च को महिला दिवस क्यों मनाया जाने लगा. इसके पीछे रूसी कनेक्शन है. बोल्शेविक क्रांति के दौरान महिलाओं ने भी जमकर हड़ताल की थी, उनकी मांग थी कि वो वोट दे सकें. इस हड़ताल के बाद महिलाओं को वहां वोट देने का अधिकार दिया गया. जिस दिन ये हड़ताल शुरू हुआ उसी दिन 8 मार्च की तारीख थी. इसलिए भी 8 मार्च को महिला दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा.

संयुक्त राष्ट्र ने साल 1975 में महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी और तब से हर साल अलग-अलग थीम के साथ इसे मनाया जाता है. साल 2019 की थीम है- ‘बैंलेस फॉर बैटर’

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