महाशिवरात्रि स्पेशल: अद्भुत काशी विश्वनाथ मंदिर के बारे में वो बातें जो शायद आप नहीं जानते होंगे

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महाशिवरात्रि के खास अवसर पर आपको लेकर चलते हैं बाबा विश्वनाथ की नगरी यानी काशी. काशी जिसे बनारस और वाराणसी नाम से भी जाना जाता है. काशी का जिक्र उपनिषद औ पुराणों में किया गया है. इस नगर ने सैंकड़ों साल से देश और दुनिया के परिवर्तन को देखा है. काशी ने खुद कई हमलों को सहा है औऱ फिर उठ खड़ा हुआ है ये शहर. आइए जानते हैं काशी के विश्वनाथ मंदिर के बारें में बेहद खास बातें-

विश्वनाथ मंदिर
  1. 1490 में हुई थी मंदिर की स्थापना
    काशी विश्वनाथ मंदिर की स्थापना साल 1490 में मानी जाती है. इस मंदिर को कई बार हमले सहने पड़े हैं लेकिन हर बार इसे फिर से स्थापित किया गया है. आफको बता दें कि काशी शब्द काश से बना हुआ है जिसका मतलब है चमकना.

2. अकबर ने स्वीकृति दी औरंगजेब ने ध्वस्त कराया
आपको बता दें कि मुगल बादशाह अकबर ने मंदिर के निर्माण को इजाजत दी थी. बाद में मुगल शासक औरंगजेब ने ही मंदिर को ध्वस्त कराया. फिर कई सालों बाद रानी अहिल्याबाई होल्कर ने इस मंदिर का पुनर्निमाण कराया. माना जाता है कि अहिल्याबाई के सपनों में भगवान शिव आए थे.

3. मस्जिद आज भी मौजूद
औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर पर कहर बरपाया था. मंदिर को ध्वस्त कर मस्जिद बनाने का फैसला सुनाया. मंदिर के कुछ अवशेष आज भी मस्जिद की दीवार पर कलात्मक तौर पर अंकित हैं.

शिवलिंग

4. कुएं में रखी गई थी शिवलिंग !
बताया जाता है कि औरंगजेब जब मंदिर को नष्ट करने पहुंचा था. तो शिवलिंग को बचाने के लिए उसे कुंए में छिपा दिया गया था. ये कुआं आज भी ज्ञानवापी कुएं के नाम से जाना जाता है और मंदिर और मस्जिद के बीच में हैं. बताया जाता है कि इस कुएं में भारी संख्या में सांप-नाग रहते हैं.

5. छत्ते को देखकर पूरी होती हैं मनोकामनाएं
आपको बता दें कि भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक काशी में प्रतिष्ठित है. इसलिए काशी विश्वनाथ मंदिर की भक्तों में बहुत मान्यता है. मंदिर के सबसे उपरी भाग में एक सुनहरा छत्ता है. माना जाता है कि इसके दर्शन होने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.

6. काशी में सूर्य की पहली किरण पड़ती है !
मान्यता है कि धरती जब बनी थी, उसके बाद सूर्य की पहली किरण सबसे पहले काशी पर ही पड़ी थी. ऐसा भी लोग मानते हैं कि भगवान शिव काशी आकर कुछ दिन ठहरे थे.

7. काशी के रक्षक हैं भगवान शिव
मान्यता है कि भगवान शिव , काशी और काशी में रहने वालों के संरक्षक हैं. काशी में 9 ग्रह अपनी मर्जी से कुछ भी नहीं कर सकते हैं, ये सारे ग्रह भगवान शिव के अधीन हैं. मान्यताओं में ये भी है कि भगवान शिव को ढूंढते हुए शनि भी काशी आए थे और मंदिर में साढ़े सात साल तक घुस नहीं पाए थे. ऐसे में जब कभी आप विश्वनाथ मंदिर जाते हैं तो आपको मंदिर के बाहर शनिदेव का दर्शन करना होता है.

8. मोक्ष की प्राप्ति के लिए आते हैं लोग
ऐसा माना जाता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर में शिवलिंग के महज दर्शन से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है. ऐसे में जब मंदिर के कपाट साल भर खुले रहते हैं. दुनिया भर से श्रद्धालु भगवान शिव का दर्शन करने आते हैं. इस मंदिर में कुल 5 आरतिया होती हैं, जो बेहद दर्शनीय होती हैं. कोई अगर एक बार देख ले तो जिंदगी भर भूल नहीं सकता है.

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