नमो टीवी का सच क्या है? कौन से कानून के तहत चल रहा है ये टीवी चैनल?

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चुनाव के दौर में पार्टियां हर तरह के हथकंडे अपनाती हैं. प्रचार के नए-नए साधन इस्तेमाल करती हैं. ऐसे ही चुनावी प्रचार के साधनों में नमो टीवी का नाम आजकल सुर्खियों में है. और ये नमो यानी नरेंद्र मोदी टीवी विवादों के घेरे में हैं. इस टीवी चैनल पर पीएम के भाषण से लेकर बीजेपी की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि दिनभर दिखाई जाती है. प्रधानमंत्री के ट्वीट से लेकर बीजेपी के हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस चैनल का प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है. लेकिन क्या ये सही है?

नमो टीवी पर हैं कई बड़े सवाल

फोटो-सोशल मीडिया

विपक्ष तो इसे आचार संहिता का बड़ा उल्लंघन बता रहा है. कई सवाल ऐसे हैं जिसका जवाब अबतक नहीं मिला है. जैसे

  • आखिर कौन से कानून के तहत चल रहा है नमो टीवी?
  • इस चैनल के पास प्रसारण के कौन से लाइसेंस हैं भाई?
  • चैनल चलाने में किसका पैसा लगा है और उसे इससे मुनाफा कैसे हो रहा है?
  • देश की सत्ताधारी पार्टी जब एक ऐसे चैनल को दिन रात प्रमोट कर रही है तो क्या ये आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है.

क्या है टीवी चैनलों के नियम-कानून?

फोटो-सोशल मीडिया

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नमो टीवी के पास किसी भी तरह का ब्रॉडकास्ट लाइसेंस नहीं है साथ ही जरूरी सिक्योरिटी क्लियरेंस भई नहीं है. फिर भी चैनल बेधड़क चले जा रहा है. वहीं देश में टीवी चैनलों का प्रसारण केबल टेलीविजन नेटवर्क्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1995 के तहत होता है. टीवी चैनल शुरू करने के लिए सूचना-प्रसारण मंत्रालय को आवेदन करना होता है. मंत्रालय उसे सिक्योरिटी क्लीयरेंस के लिए गृह मंत्रालय को भेजता है.

नमो टीवी का बैकग्राउंड

फोटो-ट्विटर

नमो टीवी का प्रसारण सबसे पहले साल 2012 में गुजरात विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुआ था. शुरुआत में इसे सुजय मेहता नाम के शख्स अपनी कंपनी के तहत चला रहे थे. लेकिन णब सुजय मेहता का कुछ मीडिया हाउस से ये कहना है कि वो अब इस टीवी के साथ नहीं जुड़े हैं और न ही इसे चला रहे हैं, न ही उन्हें ये पता है कि आखिर इसे कौन चला रहा है.

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