आरक्षण की पतंग और कर्नाटक का सियासी पेंच, जानें यहां हफ्ते भर की हर खास बात

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HARIDWAR, INDIA – FEBRUARY 12: (Photo by Daniel Berehulak/Getty Images)

बीते सप्ताह संगम पर करोड़ों लोगों ने आस्था की गहरी डुबकी लगाई तो सामान्य वर्ग के आरक्षण की पतंग ने भी आसमान की ऊंचाई की ओर रुख किया। वहीं विधायकों के समर्थन-विरोध के दावों और खरीद-फरोख़्त के आरोपों के कारण कर्नाटक में पॉलिटिक्स का नया नाटक देखने को मिला।

केंद्र में बने विपक्षी महागठबंधन ने भी मोदी सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाकर आगामी चुनाव को कांटे की टक्कर वाला बना दिया है। सप्ताह की खास खबरों और उनकी अपडेट के साथ हम हाजिर हैं फिर एक बार-

केंद्र शासित बीजेपी ने सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण का जो ट्रम्प कार्ड एन चुनाव के पहले खेला है उसकी जद में सभी दल आ गए हैं। गुजरात में 14 जनवरी को आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के प्रार्थी के लिए आरक्षण लागू कर दिया गया।


नई तिकड़म

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सामान्य वर्ग के आरक्षण के पेंच को विपक्षी समझ पाते इससे पहले ही मोदी सरकार का नया आरक्षण अस्त्र मुसीबत ढाने तैयार है। जी हां मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक निजी शिक्षण संस्थानों में भी आरक्षण लागू करने की सरकार की मंशा है। जिसमें एससी-एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग के पात्र हितग्राही को लाभ मिलेगा।


निगलें कि उगलें!

आरक्षण के पेंच के बाद मध्यप्रदेश और पश्चिम बंगाल के सीएम की लगभग यही स्थिति है। एमपी के सीएम कमलनाथ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिलहाल पशोपेश में हैं कि वो आरक्षण लागू करें या नहीं? दरअसल यदि दोनों सीएम आरक्षण लागू करते हैं तो ऐसा करके वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मास्टर स्ट्रोक को सही करार दे बैठेंगे। जबकि मना करने पर दोनों पार्टियां संबंधित वर्ग के मतदाताओं के वोट से हाथ धो सकती हैं।


कर्नाटक में अब तक

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कर्नाटक में विधायकों के रूठने मनाने के संकट से जूझ रही प्रदेश सरकार ने बीजेपी पर उनके विधायकों की खरीद फरोख्त का आरोप लगाया है। यहां कांग्रेस और जदएस के विधायकों ने राज्य सरकार के लिए खतरे की घंटी बजाई है। खबरों के मुताबिक फिलहाल कर्नाटक में पक्ष-विपक्ष के जन प्रतिनिधियों के बीच लुका-छिपी का खेल चल रहा है।


ढिशुम-ढिशुम शुरू!

ताजा खबर है कि, कांग्रेस के विधायकों पर भी सुपर ब्लड वुल्फ मून का असर दिखा। रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक कांग्रेस के विधायकों के बीच रिज़ॉर्ट में मारपीट के बाद नेताजी को अस्पताल में भर्ती तक होना पड़ गया। सूत्रों के मुताबिक एक नेता ने दूसरे के सिर पर बोतल दे मारी।

इस बारे में साथी नेताओं के बताया है कि सीने में दर्द के चलते साथी कांग्रेस नेता को अस्पताल पहुंचाना पड़ा। आपको बता दें झगड़े की जगह वही स्थान है जहां कांग्रेस के विधायक अघोषित अज्ञात काल काट रहे हैं। मतलब कर्नाटक से नए नाटक की स्क्रिप्ट अगले हफ्ते की खास खबरों में आपको देखने-सुनने मिल सकती हैं।


टॉप क्लास लीडर अस्पताल में

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वैसे सप्ताह भर बीजेपी के टॉप लीडर्स के भी अस्पताल पहुंचने की खबरें सुर्खियों में रहीं। हैल्थ रिलेटेड प्रॉब्लम्स के चलते फाइनेंस से लेकर कानून मिनिस्टर तक इस दौरान अस्पताल में भर्ती हुए। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी स्वाइन फ्लू संबंधी बीमारी की खबर को ट्विटर के जरिए लोगों तक फैलाया। जबकि अरुण जेटली के कैंसर और रविशंकर प्रसाद के सीने में परेशानी होने की खबरों ने भी ध्यान खींचा।


वर्मा के बाद अस्थाना भी रवाना

सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा वाले मामले की एंडिंग के बाद विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की भी एजेंसी से छुट्टी हो गई। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय समिति ने यह फैसला लिया। आपको बता दें, वर्मा और अस्थाना के बीच आरोप प्रत्यारोप बढ़ने पर दोनों को पहले आधी छुट्टी पर भेजा गया और अब सरकार ने उनकी लगभग पूरी छुट्टी कर दी है।


भारतीय क्रिकेट का नया अध्याय

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टेस्ट सीरीज़ जीतने के बाद भारत ने टीम ऑस्ट्रेलिया को वनडे सीरीज़ में भी हराकर क्रिकेट जगत में अपनी सुनहरी पहचान बनाई। भारत ने सेमीफाइनल और फाइनल बन चुके सीरीज़ के दूसरे और तीसरे वनडे में ऑस्ट्रेलिया को आसानी से हराकर ऑस्ट्रेलियाई किले को ध्वस्त कर दिया। अंतिम मैच में युजवेंद्र चहल ने 6 विकेट लेकर जहां उपयोगिता साबित की वहीं सीरीज़ में धोनी ने बता दिया कि क्यों उनको मैच विनर से कम नहीं आंका जाना चाहिए।


नरम नहीं ममता का रुख


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ममता बनर्जी की मध्यस्थता में बीते सप्ताह 23 विपक्षी दल एक साथ एक मंच पर दिखे। ये महागठबंधन लोकसभा की 295 सीटों पर दखल रखता है। बीजेपी के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा से लेकर बागी शत्रुघ्न सिन्हा ने भी यहां मंच साझा किया।

दोनों ने इस दौरान केंद्र सरकार और मोदी के प्रति शत्रुता दिखाई। रैली में अरुणाचल, कर्नाटक, बिहार, साउथ से लेकर गुजरात तक के नेताओं के अलावा कांग्रेस के नेताओं ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए।

ये तो रहा अब तक का अपडेट, अगले हफ्ते की उन खास खबरों खबरों के साथ हम अगले हफ्ते फिर हाज़िर होंगे जिनसे आपका सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कुछ न कुछ वास्ता है। साप्ताहिक रिपोर्ट के बारे में अपनी राय जरूर दें ताकि कंटेंट को आपके मुताबिक और भी रुचिकर बनाया जा सके।

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