भगत सिंह

शहीद दिवस: पाकिस्तान का ये शख्स भगत सिंह के लिए कर रहा है बेहद खास, इस जज्बे को सलाम

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वो कहते हैं न कि शहीदों को चाहने वालों की कोई सरहद नहीं होती. इसी तर्ज पर पाकिस्तान में एक शख्स शहीद भगत सिंह के लिए कुछ बेहद खास कर रहा है. जहां हम भारतीय भगत सिंह को अपनी-अपनी विचारधाराओं से जोड़ने में ही लगे हुए हैं. 23 मार्च आते ही अलग-अलग राजनीतिक और वैचारिक पार्टियां ये दावा करने में जुट जाती हैं, कि भगत सिंह तो सिर्फ उनके ही थे. ऐसे में पाकिस्तान के इस शख्स को सलाम करने का दिल होता है.

फोटो- इंडियन एक्सप्रेस

भगत सिंह की बेगुनाही की लड़ाई

पाकिस्तान के एक वकील इम्तियाज राशिद कुरैशी ने हाल ही में लाहौर हाईकोर्ट में अर्जी दी है. भगत सिंह को फांसी चढाए जाने के 86 साल बाद साल 2017 में राशिद कुरैशी ने उन्हें बेगुनाह साबित करने के लिए ये अर्जी दाखिल की है. आपको बता दें कि एक अंग्रेज पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या के मामले में भगत सिंह को फांसी दी गई थी. सांडर्स को लाला लाजपत राय का हत्यारा माना जाता है. अब राशिद भगत सिंह को बेगुनाह साबित करने में जुटे हुए हैं. उन्होंने पाक के चीफ जस्टिस से आग्रह किया था कि बड़ी बेंट गठित की जाए, लेकिन ये मामला आगे नहीं बढ़ सका.

राशिद भगत सिंह फाउंडेशन चलाते हैं

फोटो- यूट्यूब

राशिद पाकिस्तान में भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन चलाते हैं. भगत सिंह भारत-पाकिस्तान दोनों के सबसे बड़े हीरो में से एक रहे हैं. जब भारत का बंटवारा नहीं हुआ था, उस वक्त उन्होंने बिना किसी धर्म, जाति या समुदाय की परवाह किया, अपना पूरा जीवन देश की आजादी को समर्पित कर दिया था. अक्सर लाहौर के शादमन चौक पर भगत सिंह की मूर्ति लगाने की मांग उठती है. ये वो ऐतिहासिक चौक है जहां भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी पर चढ़ा दिया गया था.

23 मार्च नहीं 24 मार्च को होनी थी फांसी

फोटो-ट्विटर

अंग्रेजों ने अपनी धूर्तता का परिचय देते हुए भगत सिंह और उनके साथियों को 1 दिन पहले ही यानी 24 मार्च की जगह 23 मार्च 1931 को ही फांसी पर लटका दिया था. अंग्रेजों को ये अंदेशा था कि भगत सिंह की फांसी पर विद्रोह हो सकता है.

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