Teacher’s Day: मिलिए एक ऐसी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट टीचर से जो विदेशियों को सिखाती हैं हिंदी

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इस शिक्षक दिवस को सेंटर वीमन आपको एक ऐसी महिला शिक्षक पल्लवी सिंह से मिलाने जा रहा है, जिन्होंने डिग्री तो इंजीनियरिंग में ली. लेकिन हिंदी को अपनी पहचान बनाकर अब विदेशियों को हिंदी सीखा रही हैं. देश में फिलहाल एक बड़ी आबादी, इंग्लिश बोलना सीखने की कोशिश कर रही है. आखिर ऐसा हो क्यों ना, स्टेटस सिंबल की जो बात है. लेकिन बता दें कि देश में हिंदी सीखने वालों की भी कमी नहीं है. पल्लवी सेलिब्रिटीज और विदेश मेहमानों को हिंदी से रूबरू कराती हैं.

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पल्लवी चंद घंटों में सीखा देती हैं हिंदी

पल्लवी ने लगातार प्रैक्टिस के जरिए ऐसा इनोवेटिव तरीका पैदा कर लिया है, जिसकी मदद से वो किसी हिंदी न जानने वाले को कुछ ही घंटों में इतना तो सीखा देती हैं कि उसका काम चल जाए. वो हिंदी को समझन सीख जाए.

अच्छा तो ये भी इंजीनियर हैं!

तमाम अलग हटकर काम करने वालों की तरह, पल्लवी सिंह ने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. दिल्ली में पलने बढ़ने वाली पल्लवी अब मुंबई में लोगों हिंदी सीखा रही हैं. सिंह ने हिंदी और इनोवेटिव टीचिंग को ही अपना करियर चुना है. उनका बचपन चंपक, नंदन और प्रेमचंद की कहानियां पढ़ते हुए बीता है.

ऐसी हिंदी सिखाती हैं कि भारत में विदेशियों का काम चल जाए

बचपन में हिंदी की कहानियां पढ़-पढ़कर सिंह का रूझान हिंदी की तरफ हो गया. वो ऐसी हिंदी सिखाती हैं, जो लोगों को भारत में रहने के दौरान वाकयी काम आ सके, इसके ज़रिये वो उन्हें बात-चीत में आने वाली दिक्कतों से मुक्त कर देती हैं. इसके बाद वो इतना तो सीख ही जाते हैं कि हिंदी में रास्ता पूछ सकें, ख़रीददारी कर सकें, मोल-भाव कर सकें या खाना ऑर्डर कर पाएं। कई टूरिस्ट भी उनसे हिंदी सीखने आते हैं.

क्लाइंट्स की लिस्ट

उनके क्लाइंट्स की लिस्ट में मॉडल्स, सिंगर, बॉलीवुड स्टार्स तक शामिल हैं यहां तक कि जैकलीन फ़र्नांडेज़ भी उनकी स्टूडेंट रह चुकी हैं.

उन्होंने कॉलेज के साथ ही ट्यूशन लेना शुरू कर दिया था और आज वो एक सेलेब्रिटी ट्यूटर बन गयी हैं. हिंदी सिखाने का उनका तरीका पारंपरिक तरीके से एकदम जुदा है. उन्होंने अपने क्लाइंट्स की ज़रूरतों के हिसाब से एक आसान मॉड्यूल तैयार किया है, जिससे बोले जाने वाली हिंदी सीखी जा सकती है.

हिंदी बोलने में शर्म कैसी?

पल्लवी के क्लाइंट्स ज़्यादातर विदेशी लोग होते हैं, जो भारत आते हैं. वन-टू-वन क्लासेस के ज़रिये वो लोगों की भाषा सम्बंधित दिक्कतें हल करती हैं. जाहिर है कि पल्लवी को अपनी भाषा और हिंदी पर गर्व है. देश में आज कई ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें हिंदी बोलने में शर्म महसूस होती है. पल्लवी बताती हैं कि विदेशी लोग हिंदी की इज्ज़त करते हैं. पल्लवी की इस सोच को Centre Women का सलाम…

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