उम्र महज एक नंबर है, देश की सबसे बुजुर्ग महिला ट्रैवल गाइड रमा बेन ने ये साबित कर दिया

Welldone

कुछ महिलाएं अलग करने के लिए ही पैदा होती हैं. लीक से हटकर करने का उनका ये जज्बा दूसरे महिलाओं के लिए मिसाल बन जाता है. देशभर में कई महिलाएं अलग-अलग सेक्टर से जुड़ी हैं, कुछ गृहणी हैं और अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं. ये सारी महिलाएं 90 साल की रमा सत्येंद्र खंडवाला से कुछ न कुछ सीख सकती हैं.

(फोटो- टाइम्स ऑफ इंडिया)

रमा को देश की सबसे बुजुर्ग ट्रैवल गाइ़ड का दर्जा हासिल है. आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें:

आगरा में सक्रिय हैं रमा बेन

90 साल की रमा सत्येंद्र खंडवाला को लोग प्यार से रमा बेन भी कहते हैं. आगरा में वो काफी मशहूर हैं. इस उम्र में भी वो बतौर ट्रैवल गाइड काफी एक्टिव हैं और सप्ताह में कई असाइनमेंट ले लेती हैं. कई दशकों का अनुभव साथ ही कई भाषाओं पर पकड़ रमा बेन को एक बेहतरीन पर्यटक गाइड बनाता है. वो काफी समय से जापानी, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में पारंगत हैं.

म्यांमार में पैदा हुई थीं रमा बेन

रमा सत्येंद्र खंडवाला का जन्म म्यांमार के रंगून में हुआ था. उनके पिता की ज्वैलरी की दुकान थी ऐसे में वो एक संपन्न परिवार से संबंध रखती थी. टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया था कि उनके पिता की महात्मा गांधी से अच्छी खासी पहचान थी. शुरुआत से ही भारत की आजादी के लिए उनके परिवार में खूब जज्बा था जिसका असर रमा बेन पर भी पड़ा था.

नेताजी की सेना की बेहतरीन सिपाही थीं

नेताजी सुभाषचंद्र बोस के रंगून दौरे के वक्त रमा बेन की मुलाकात नेताजी से हुई. वो नेताजी के विचारों से काफी प्रभावित हुईं और उन्होंने आजाद हिंद फौज में शामिल होने का मन बना लिया. रमा बेन फौज के झांसी रेंज में बतौर सेकेंड लेफ्टिनेंट भी काम कर चुकी हैं.

साल 1946 में रमा बेन का परिवार भारत आया

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उनके पूरे परिवार को घर में ही नजरबंद कर दिया गया था. बाद में हालात को बदलता देख उनका परिवार म्यांमार से भारत आकर मुंबई में बस गया. भारत आकर रमा बेन ने शुरुआत में नर्सिंग का काम किया फिर बतौर भाषा अनुवादक भी अच्छा खासा काम किया.

कैसे आईं ट्रैवल गाइड के प्रोफेशन में

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार की एक ट्रैवल गाइड स्किल प्रोग्राम में उन्होंने हिस्सा लेने का फैसला लिया और जल्द ही काफी कुछ सीख लिया. रमा बेन मानती हैं कि ये एक ऐसी नौकरी हैं जिसमें आपको दुनिया को समझने का मौका मिलता है, कई देशों के लोगों से मिलने के मौके के साथ ही पूरा एडवेंचर भी है.

रमा बेन को क्या खटकता है?

रिपोर्ट में रमा बेन कहती हैं कि ट्रैवल गाइड, अनऑफिशियल तौर पर किसी भी देश के प्रतिनिध होते हैं. उनके हर एक व्यवहार का असर देश की इमेज बनाता है ऐसे में गाइड्स को सतर्क और संवेदनशील होना चाहिए. महिलाओं के बारे में रमा बेन की राय है कि ट्रैवल गाइड के प्रोफेशन में सिर्फ 17-18 फीसदी ही महिलाएं हैं, उन्हें ज्यादा से ज्यादा इस प्रोफेशन से जु़ड़ना चाहिए.

ये भी पढ़ें: 91 वर्षीय की जिमनास्ट जोहन्ना क्वास हैं सबके लिए मिसाल.. देखें Photo Gallery

Comments

comments

Leave a Reply