बरसों की परंपरा टूटी, सबरीमाला में पहली बार महिलाओं की एंट्री

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केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री का रास्ता साफ हो जाने के बाद भी महिलाओं को एंट्री नहीं मिल रही थी. अब मंदिर परिसर में दो महिलाओं ने एंट्री ले ली है. ऐसे में बरसों से चली आ रही परंपरा भी टूट गई है. हालांकि, मंदिर में 50 साल से कम उम्र की महिलाओं की एंट्री हो जाने के बाद ‘मंदिर का शुद्धीकरण’ किया जा रहा है. इन दोनों महिलाओं ने मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की है, हालांकि मुख्य हिस्से तक पहुंचने से पहले ही इन्हें रोक लिया गया.

धार्मिक नहीं सियासी मुद्दा बन गया है सबरीमाला

सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना साफ फैसला सुनाया था और महिलाओं को मंदिर में जाने की इजाजत दी थी. लेकिन इसके बाद से ही राजनीतिक पार्टियां भी इन परंपराओं को बचाने के लिए सामने आ खड़ हुईं. पार्टियां बंटी हुईं हैं, कुछ एंट्री के पक्ष में है तो कुछ विपक्ष में, लेकिन इन सबके बीच देश की आधी आबादी अब भी इज्जत से इस मंदिर में जाने की इजाजत मांग रही है. अब महिलाओं की एंट्री के बाद कुछ नया सियासी ड्रामा देखने को मिल सकता है.

अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं की मंदिर में एंट्री से बैन करने को धार्मिक परंपरा नहीं माना जा सकता है. ये नियम महिलाओं को जैविक प्रक्रिया के आधार पर महिलाओं को अधिकारों से वंचित करता है. कोर्ट ने कहा था कि पितृसत्तामक धारणा को आस्था में समानता के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. कोर्ट ने कहा था कि भक्ति में कैसा भेदभाव.

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