गरिमा यात्रा: दिल्ली में 5000 से ज्यादा दलित-आदिवासी रेप पीड़िताएं हुईं इकट्ठा, सोशल मीडिया नहीं सड़क पर कही अपनी बात!

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आज के समाज में जहां अब भी अगर किसी लड़की के साथ रेप या ऐसी घटना होती है तो उसे ही दोष दिया जाता है वहां दलित-आदिवासी महिलाओं की ये गरिमा यात्रा काबिल-ए-तारीफ है. ये वो लौ है जो उम्मीद बनकर लड़कियों की जिंदगी रौशन कर सकती है. ऐसी मुहिम को आगे बढ़ाने की जरूरत है.

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दिल्ली के रामलीला मैदान में देशभर से आईं दलित और आदिवासी वो महिलाएं इकट्ठा हुईं जिनके साथ रेप हुआ था. बिना किसी घूंघट या खुद को लेकर असहज भावना से इन्होंने अपने सम्मान की बात की. राष्ट्रीय गरिमा अभियान नाम की संस्था ने इसके द्वारा महिलाओं के अंदर एक नई ऊर्जा का संचार किया है.

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ये यात्रा 20 दिसंबर को बच्चों, दलित-आदिवासी महिलाओं के खिलाफ रेप जैसे अपराधों को खत्म करने के लिए शुरू की गई थी. 24 राज्यों और 200 जिलों से होते हए ये महिलाएं 22 फरवरी को दिल्ली पहुंची. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इन महिलाओं ने देश के कई हिस्सों में कभी खुले आसमान तो कभी धर्मशालाओं में अपने दिन गुजारे. इस 65 दिन की यात्रा में महिलाओं ने अपनी चुप्पी तोड़कर खुलकर बोलने का आत्मविश्वास पाया है. इन महिलाओं की आपबीति सुनकर आपके भी रौंगटे खड़े हो जाएंगे.

FirstPost हिंदी के लेख का एक अंश-

इन्हीं में से एक मध्य प्रदेश, रीवा की रहने वाली पलवा (बदला हुआ नाम) ने अपनी कहानी हमसे साझा की.

पलवा की उम्र 20 साल है. जब बलात्कार हुआ, तब 18 की थीं. उस दिन को याद करते हुए वे बताती हैं, ‘ मैं ग्यारहवीं में पढ़ती थी. स्कूल करीब एक किलोमीटर की दूरी पर था. रोज पैदल ही रास्ता तय करती थी, लेकिन आम दिनों की तरह उस दिन मेरे साथ मेरी कोई दोस्त नहीं थी. मैं अकेली ही थी. रास्ते में एक वैन में बैठे तीन लोगों ने मुझे अगवा कर लिया. मेरा मुंह बांध दिया गया. और वो मुझे दूर कहीं पहाड़ी इलाके में ले गए. वहां दूर-दूर तक केवल जंगल ही जंगल था. तीनों ने मुझे वहां गाड़ी से नीचे उतारा. मारते-पीटते जंगल में ले गए. और एक-एक करके करीब डेढ़ घंटे तक मेरा रेप किया.

फिर वह मुझे वहां से मध्य प्रदेश के बाहर ले गए. यहां मुझे एक कमरे में बंद रखा गया. रोज रात को यह तीनों एक-एक कर के मेरा रेप करते थे. यह सिलसिला एक महीने तक चला.

इधर मेरे मम्मी-पापा ने मेरी गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवा दी थी. करीब डेढ़ महीने बाद पुलिस मुझे ढूंढते हुए वहां पहुंच गई. दोषी गिरफ्तार हो गए और मैं वापस रीवा आ गई. यहां मेरी मेडिकल जांच हुई. गंदे-गंदे सवाल पूछे गए. कैसे करता था? मजा आता था? दिन में कितनी बार करता था?

ऐसे में रीवा पहुंचने के बाद मेरा पहला दिन पुलिस स्टेशन में ही गुजरा. अगले दिन मुझे पुलिस स्टेशन से लेने मेरे मामा आएं. घर आकर उन्होंने बिना बात के मुझे पीटा. मेरे मां-बाप से मुझे जान से मार देने की बात कही. पापा तैयार भी हो गए, लेकिन मां बीच में आ गई. इधर पड़ोसी बीस तरह की बात बोलते थे. ‘खुद चली गई होगी. गरमी होगी बहुत. उसी के साथ रह जाती. मार डालते. और भी ना जाने क्या-क्या.

कुछ समय बाद मेरे मां-बाप ने मेरी शादी ठीक कर दी. मेरे पति को मेरे बलात्कार के बारे में नहीं बताया गया. शादी के बाद जब उन्होंने मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाया और मुझसे पूछा कि क्या तुम्हारा पहले भी संबंध रह चुका है?

तब मैंने सारी बात अपने पति और ससुराल वालों को बता दी. मेरे पति ने मुझे छोड़ दिया. अब वो दूसरी शादी करने वाले हैं. सास-ससुर कोई बात नहीं करते. मैं अपने मां-बाप के साथ रहती हूं.और अब इज्जत ले डूबी, मर जाती, पैदा ही नहीं होती जैसी बातें सुनने की आदी हो गई हूं.

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