पीहू ट्रेलर:इमरजेंसी के समय बच्चे कैसे रख सकते हैं अपना ख्याल, जानिए यहां!

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डायरेक्टर विनोद कापड़ी की फिल्म पीहू का ट्रेलर लोगों को खूब पसंद आ रहा है. ट्रेलर में दिखाया गया है कि कैसे दो साल की पीहू घर में अकेले चीजों का सामना करती है. इस फिल्म के ट्रेलर में दिखे कुछ दृश्य आपके रोंगटे खड़े कर देंगे. इसे देखकर आपके मन में एक बार ये ख्याल जरूर आएगा कि ऐसे किसी हालात में आपका बच्चा फंस गया तो!

छोटे बच्चों को किसी भी तरह की इमरजेंसी के लिए तैयार करना बड़ों का कर्तव्य है. अगर वो घर पर अकेले हों तो उनके साथ कोई अनहोनी ना हो इसके लिए उन्हें कुछ बातें समझाना जरूरी है.

  • समझाएं क्या है आपातकाल यानि इमरजेंसी का मतलब- बच्चे बहुत छोटे होतें लेकिन अगर कोई बात उन्हें समझाया जाए तो वो जल्दी समझ भी जाते हैं. बच्चों को बताएं कि इमरजेंसी वाले हालात क्या होते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर वो घर में अकेले हों तो उन्हें क्या करना चाहिए. किस पर भरोसा करना चाहिए. अगर लाइट ना हो तो टॉर्च कहां रखा है उन्हेंं ये बताएं. बिजली का कोई तार ना छुएं इत्यादि.
  • फोन नंबर की एक डायरी बनाएं– ये भी एक सरल तरीका है. आपको याद होगा बचपन में जब फोन सबके पास नहीं थे तो हमारे माता-पिता एक डायरी में सबका नंबर लिखकर रखते थे. वो हमारे भी बहुत काम आती थी. इस समय में भी आप ऐसा कर सकते हैं. आप दो डायरी बना सकते हैं. एक जो बच्चे के बैग में रहे और दूसरी घर पर. फोन नंबर की डायरी में अपना और खास लोगों का नंबर रखें. यदि आपका बच्चा कहीं फंस जाता है तो वो इसका इस्तेमाल कर सके. आजकल सबके पास फोन होते हैं.
  • इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर की जानकारी दें– हॉस्पिटल, पुलिस, फायर ब्रिगेड आदि के हेल्पलाइन नंबर बच्चों को मुंहजुबानी याद कराएं और घर के किसी दीवार पर लिख कर रखें. ताकि समय आने पर बच्चा उसका इस्तेमाल कर पाए. बच्चों को इन नंबर के बारे में बताएं कि कौन सा नंबर किस काम आता है. कभी-कभी बच्चों का इस बारे में टेस्ट लें. अचानक पूछें कि कौन सा इमरजेंसी नंबर किस काम आता है और कब इसका इस्तेमाल किया जाता है.
  • आपातकाल की स्थिती में क्या करना चाहिए, ये समझाएं- बच्चों को बताएं कि अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो उस समय कैसे निकला जाए. उन्हें बताएं कि बिल्डिंग से बाहर निकलने का रास्ता क्या है, अगर घर में माता-पिता या रिश्तेदार बीमार है तो उसकी सहायता कैसे करें, अगर घर में आग लग जाए तो कैसे बाहर निकलें.
  • बच्चों के साथ खेलें- बच्चों को समझाने का सबसे बेहतर तरीका है उन्हें खुद से कर के दिखाना. खेल-खेल में बच्चों को आपातकालीन हालातों से बचना सिखाएं. इसके जरिए बच्चा इमरजेंसी के तनाव की स्थिती में खुद संभलना सीखेगा.

 

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