आखिर इतिहास ने क्यों भुला दिया सरदार पटेल के दाहिने हाथ का नाम?

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आज देश सरदार पटेल की जयंती मना रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पटेल की रबसे ऊंची मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को देश को समर्पित किया है. देश के लौैह पुरुष सरदार पटेल ने आजादी से पहले और बाद में देश को एक करने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. ये मूर्ति दुनिया  की सबसे ऊंची मूर्ति बन गई है.

Credit- LIFE

सरदार पटेल की बेटी मणिबेन पटेल को उनका दाहिना हाथ माना जाता है. लेकिन इतिहास ने उनकी तपस्या और देशप्रेम को अपने पन्नों में उचित जगह नहीं दी. 6 साल की उम्र में मांं के निधन के बाद ही वो सरदार पटेल के राजनीतिक जीवन से जुड़ चुकी थीं. वो एक स्वतंत्रा सेनानी थीं और गांधी जी के रास्ते पर चलकर उन्होंने अपना जीवन व्यतीत किया. मणिबेन ने कभी शादी नहीं की और अपनी जिंदगी देश के नाम समर्पित कर दी. सरदार पटेल के द्वारा चलाए गए हर आंदोलन में मणिबेन ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और बाकी औरतों को भी प्रेरित किया. चाहे 1928 का बारडोली सत्याग्रह या असहयोग आंदोलन, हर जगह मणिबेन आगे रहीं. वो बाकी स्वतंत्रता सेनानियों की तरह जेल भी गईं.

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फादर ऑफ वाइट रेवल्यूशन वी कुरियन ने लिखा है कि मणिबेन पटेल एक वफादार और ईमानदार महिला थीं. सरदार पटेल की मृत्यु के बाद उन्होंने उनकी एक किताब और एक बैग सीधे पंडित नेहरू को दे दिया. उस बैग में कांग्रेस पार्टी के लाखों रुपये थे और किताब में बहीखाता लिखा हुआ था. ऐसा उन्होंने अपने पिता के कहने पर ही किया था.

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